Radharamano Vijayate

Hindi —
*कथा सूत्र*
*मनमाधवगौडेश्वर वैष्णवाचार्य श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज*
गुरुदेव महाराज कहते हैं, कि हम अपने जीवन में पूर्वाग्रहों में रहते हैं। कलयुग व्याप्त हो चुका है, कल का मतलब Tommorow और yesterday ही होता है। Tommorow और yesterday में रहने वाला व्यक्ति ही कलयुगी है। युग जिसमें आने वाला कल और बीत चुका कल, में जो रहता है, वह कलयुग में ही रहता है। सतयुग क्या है, सबसे बड़ा सत्य वर्तमान ही है।जो वर्तमान में रहे वह सतयुग में रहता है। अब हम खुद ही सोचें, कि हमें कलयुग में रहना है, या सतयुग में रहना है। अभी हमारे पास बड़ी सुविधाएं हैं, पर हम भविष्य की योजनाओं में वर्तमान की सुविधाओं से वंचित हो जाएं, कितनी बड़ी मूर्खता है। अगर लक्ष्मी ने मुंह मोड़ लिया तो लाकर सीज हो जाएं। कितना भी संभाल कर रखो, संचय में ज्यादा नहीं फंसना चाहिए। सारा मोह संचय में ही है। जैसे मधुमक्खी संचय करती है कितना बड़ा छत्ता बनाती है शहद संचय करती है। कितनी मेहनत करती है, पर खुद एक भी बूंद उसकी नहीं पी पाती। और किसी दिन वह शायद का छत्ता निचोड़ कर दूसरा आदमी ले जाता है। हमारे साथ भी यही होता है हमारे सब छत्ते कोई और ही निचोड़ कर ले जाता है। इसलिए भंवरा बनकर अपने कमल का खुद रस लीजिए और आनंद करिए। जैसे कहते हैं कि *पूत सपूत तो क्यों धन संचय, कपूत तो क्यों धन संचय*
*गुरुदेव समर्पणम*
।।परमाराध्य पूज्य श्रीमन माध्व गोडेशवर वैष्णवआचार्य श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महराज ||
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