Radharamano Vijayate

Hindi —
*कथा सूत्र*
*मनमाधवगौडेश्वर वैष्णवाचार्य श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज*
गुरुदेव महाराज कहते हैं कि सबको भगवान का नाम मिला है। एकमात्र धरती पर यह लीला हुई है कि, जहां भगवान ने भी भक्त का नाम स्वीकार किया है। प्रहलाद जी का नाम भी क्या पड़ा है नरहरिदास। कोई राधारमण दास, कोई सुदामा दास, कोई रामदास, कोई कृष्णदास, पर जब रुक्मणी द्वारकाधीश पधारे, भक्त पुंडरीक तो माता-पिता के चरण दबा रहे थे। ऐसे भाव विभोर हुए कि रुको, ऐसे भावविफल हुए ठाकुर जी, कि सब मेरा नाम लेते हैं, आज मैं तेरे से अपना नाम बुलवाऊंगा। तो जगह का पहला नाम पड़ा पुंडलीकपुर,जो धीरे-धीरे पंडरपुर हो गया। और आपका भी पुराना नाम पुंडरीक नाथ ही है। आज तक ऐसा नहीं हुआ भगवान ने भगवान का ही नाम लिया, रामेश्वर, गौरी नाथ, शिव पार्वती यह सब नाम आए। भगवान से भगवान का नाम जुड़ा होगा। शिव से शक्ति, राम से शिव, ऐसा कभी घटित नहीं हुआ, कि जीव ने ब्रह्म का नाम आरोप लिया है। और इतिहास की एकमात्र यह घटना इस महाराष्ट्र में घटित हुई है, जहां भगवान ने भक्त का नाम स्वीकार किया है।
*गुरुदेव समर्पणम*
।।परमाराध्य पूज्य श्रीमन माध्व गोडेशवर वैष्णवआचार्य श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महराज ||
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