Radharamano Vijayate

Hindi —
*कथा सूत्र*
*मनमाधवगौडेश्वर वैष्णवाचार्य श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज*
गुरुदेव महाराज कहते हैं कि जीव अति आध्यात्मिक प्रवेश में भी जब उसका चिंतन लोकेशणा, वित्तेक्षणा, कामिनी, कंचन, कूर्वी, कालेवर, कदंब, जब इनके प्रति आकर्षित होता है, तो उसके भीतर वासना की धारा प्रवाहित होती है। जिस तीव्र धारा को कभी ना कभी संग के प्रभाव से कभी ना कभी आत्म नियंत्रण का बांध टूट जाए, तो ऐसी बाढ़ आती है, कि बड़े-बड़े प्रारब्ध जनक पुण्य भी उस धारा में बह जाते हैं। उपलब्धियां भी समाप्त हो जाती है। शून्य हो जाती है। और जब वही लौकिक, इन्द्रिक, भौतिक स्थिति में रहते हुए भी श्याम सुंदर की विशुद्ध अनुभूति करने का सामर्थ प्राप्त कर लेता है। अधो से अधो स्थान पर भी उसका चिंतन उर्दगमन हो जाए। वासना धारा की तरह प्रवाहित होती है, और उपासना राधा रानी की कृपा से ऊर्धगमनशील होती है। तन से बुद्धि तक, बुद्धि से विवेक तक, विवेक से आत्मा तक, आत्मा से परमात्मा तक और परमात्मा से भी प्रियतम तक हो जाती है।
*गुरुदेव समर्पणम*
।।परमाराध्य पूज्य श्रीमन माध्व गोडेशवर वैष्णवआचार्य श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महराज ||
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