Pundrik Ji Sutra 29/10/2026
Radharamano Vijayate

Hindi —
*कथा सूत्र*
*मनमाधवगौडेश्वर वैष्णवाचार्य श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज*
गुरुदेव महाराज कहते हैं कि ठाकुर जी वैष्णव को, भक्त को, आश्रित को, हृदय में रखते हैं। सही बात तो यह है, कि हम भी उसका उनका इतना भजन नहीं कर पा रहे, जितना वह हमारा भजन करते हैं। भगवान अगर हमारा स्मरण नहीं कर रहे होते, तो हमारी तो स्वास ही बंद हो जाती। इसलिए भारत ने एक दिव्य अनुभूति सबको दी है, कि हर एक परिस्थिति में भगवान की प्रसन्नता और लीला का विचार करें। कर्म करते समय हमारे जीवन में गुरु, साधु और शास्त्र का अनुशासन होना चाहिए। कर्म करते समय अगर हम विचार करें, कि यह भगवान की प्रसन्नता का विषय है, तो यह सोचनीय बात है। अब इतनी योग्यता तो हममें है नहीं,कि भगवान की प्रसन्नता का विचार हो। मूलत: तो हम अपनी प्रसन्नता का ही विचार करते हैं। इसलिए जब कोई कृत करते हैं, तो या तो शास्त्र प्रमाण हो, या गुरु ने उसकी आज्ञा दी हो जा या किसी साधु ने उसको कह दिया हो। गुरु, साधु और शास्त्र कर्म करते समय प्रमाण हैं। परंतु परिणाम में भगवान की प्रसन्नता का विचार होना चाहिए। परिणाम में अनुभव नहीं कर पा रहे। अरे हमने तो वही किया, जो भगवान की प्रसन्नता है। हम तो कथा में इसलिए गए कि भगवान प्रसन्न हैं,हम वृंदावन इसलिए जाते हैं कि भगवान प्रसन्न है, फिर हमारी दुकान क्यों नहीं चल रही। गुरुदेव महाराज कहते हैं कि हम वृंदावन गए हैं, या कोई एश्योरेंस लेने गए हैं। मीराबाई गली गली गा रही है लेकिन उसने एक पंक्ति में भी किसी को नहीं कहा। *सुख और दुख एक भिन्न विषय है, पर मनोस्थिति, आत्मस्थिति, चिंतन का प्रवाह,हरेक जीव का स्वतंत्र अनुभव है*। प्रत्येक जीव जीवन की परिस्थितियों में बड़ा समाधान पा लेता है, जब यह विचार करता है, कि इसमें भी कोई ठाकुर जी की लीला है।
*गुरुदेव समर्पणम*
।।परमाराध्य पूज्य श्रीमन माध्व गोडेशवर वैष्णवआचार्य श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महराज ||
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