Pundrik Ji Sutra 30/10/2026
Radharamano Vijayate

Hindi —
*कथा सूत्र*
*मनमाधवगौडेश्वर वैष्णवाचार्य श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज*
गुरुदेव महाराज कहते हैं कि एक माला, एक मंत्र, एक इष्ट, एक आसन, और एक समय। साधना में अगर आगे बढ़ना है, तो यह पांच चीज डिसाइड कर लीजिए।
एक माला, वह माला स्मृति दिलाती रहती है, कि आपको भजन करना है।
एक मंत्र, आपके लिए अगर दुनिया में सारे काम बनाने वाला कोई मंत्र है, तो वह है जो आपके गुरुदेव ने आपको दिया है। आपने अगर उसको छोड़कर कुछ और कर लिया, तो उसका कोई असर ही नहीं है। अगर आपका पैसा आपको मिल गया तो उससे ऊंचा क्या? एक मंत्र में जितने अक्षर हैं, उसके उतने लाख मंत्र जाप करने से वह सिद्ध हो जाता है। उसको पुरुष चरण कहते हैं।
तीसरी बात एक इष्ट, जिसको एक बार पकड़ लिया, उसको पकड़ लिया। ठीक है, कोई विशेष दिन हो किसी का जन्मदिन हो तो आपने उसका पूजन किया। पूजन करना इष्ट बनाने जैसा नहीं है। पूजन तो दामाद का भी होता है, हम गाड़ी का भी कर लेते हैं।
कोशिश कीजिए, एक आसन, आसन का मतलब होता है, कि हमारी स्थिति का भी विचार करना चाहिए। जो आपका संबंध है, जो आपकी अनुभूति है, उसका भी विचार करना चाहिए।
और अंतिम बात है एक समय, पहले समय में, समय भी निश्चित हो जाता था। जैसे ऑफिस का समय निश्चित है, स्कूल का समय निश्चित है, घर में भी कोई झंझट नहीं होगा। तो कम से कम घूमते फिरते तो हरि स्मरण करना ही चाहिए, अपने भजन का भी समय निश्चित कर लो।
*गुरुदेव समर्पणम*
।।परमाराध्य पूज्य श्रीमन माध्व गोडेशवर वैष्णवआचार्य श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महराज ||
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