Pundrik Ji Sutra 1/11/2026
Radharamano Vijayate
Hindi —

*लुधियाना भागवत कथा के मोती*
*प्रथम दिवस*
1.कोई भी चीज जब उस जगह की मूल भाषा से जुड़ती है तो उसका संस्कार पड़ता है।
2.नवरात्रि में होने वाले गरबा उत्सव अब सारे भारत में मनाया जाता है।
गरबा में बीच मैं द्वीप का प्रज्वलन करके गोल-गोल आकृति में जब उसके चारों तरफ मंडल आकृति में घूमते हैं तो एक सामूहिक ऊर्जा का प्राकट्य होता है यह शुद्ध अध्यात्म का स्वरूप है।
3.हाथ में डांडिया बस की डंडी लेकर गोल-गोल आकृति में नृत्य करने से भगवती प्रसन्न होती है।
4.दो विषय ऐसे हैं जिनमें संख्या की कोई मर्यादा नहीं है हरि कथा श्रवण और हरी नाम संकीर्तन.।
5.भक्ति के समुद्र में आने वाली लहर को ही नाम संकीर्तन कहते हैं। इससे कितना भी बच लो बच नहीं पाओगे यह तुम्हें छू ही लेगी।
6.अगर चढ़ती हुई जल की लहर नाम संकीर्तन है तो उतरती हुई जल की लहर भागवत जी की कथा है।
7.जब यह खिंचती है, तो जिस प्रकार पैरों के नीचे से रेत खिसकती है ,इसी प्रकार हमारे पैरों के नीचे से पहले आकर्षणों की रेत खिसकती है, फिर काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद मात्सरय की रेती खिसकती है। हमें पता ही नहीं चलता कि हम संसार के प्रेम में खड़े हैं ,या कृष्ण प्रेम में गढ़ते जा रहे हैं।
8.नाम उभार देता है और कथा डूबा देती है।
9.नाम संकीर्तन में जब उच्च बहू होकर भगवान का नाम पुकारते हो। जैसे कोई समुद्र में डूब रहा हो दोनों हाथ ऊपर करके बचाने की गुहार लगा रहे हो। इसलिए भवसागर से उबारने वाला भगवान का नाम है।
10.भगवान की कथा फंसाती है, पर फंसे हुए को निकालने वाला दिव्य भगवान का यह नाम है।
*गुरुदेव समर्पणम*
।।परमाराध्य पूज्य श्रीमन माध्व गोडेशवर वैष्णवआचार्य श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महराज ||
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