Radharamano Vijayate

Hindi —
*कथा सूत्र*
*मनमाधवगौड़ेश्वर वैष्णवाचार्य श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज*
गुरुदेव महाराज कहते हैं जैसे मछली को पानी से बाहर निकलो तो वह तड़पती है। फिर एक बूंद पानी मिल जाता है, तो वहां जाती है। फिर दूसरा, फिर तीसरा, और मछली अगर फिर से पानी में गिर जाए तो मस्त तैरती है। तो यह जो हमारी आत्मा है, आत्मा के सरोवर में डूबी हुई एक मछली का नाम है मन, और दुनिया के जो आकर्षण होते हैं ,मछुआरा मछली को क्या देता है, आकर्षण ही तो देता है। छोटा सा दाना डाल के पकड़ा तो पानी से बाहर आया। यह माया का मछुआरा कांटा फेंक कर खींचता है और जैसे-तैसे कोई अवसर मिल जाए गुरु, संत, साधु के माध्यम से कहीं ना कहीं से थोड़ा सा आत्मबोध हो नहीं तो फिर से मछुआरा कांटा फेंक के मन की मछली को सरोवर से बाहर निकलता है। जहां भी आत्मबोध के समाधान होते हैं वहां मन को बड़ा आनंद आता है। *समाधायो मनो ह्रदयि* भागवत जी का यह सूत्र है। समाधि ही अपने आप घटित हो जाए अगर मन आत्मा के सरोवर में डूबा रहे।
*गुरुदेव समर्पणम*
।।परमाराध्य पूज्य श्रीमन माध्व गोडेशवर वैष्णवआचार्य श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महराज ||
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