Radharamano Vijayate

Hindi —
*कथा सूत्र*
*मनमाधवगौडेश्वर वैष्णवाचार्य श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज*
*जन्माष्टमी का विधान* गुरुदेव महाराज कहते हैं कि तीन रातें ऐसी हैं, जिसमें जागने का आयुर्वेद में विधान किया है। पहली है, दीपावली, हमारे यहां दीपावली में रात को पूजा होती है। एक है शरद पूर्णिमा, उस दिन खीर बनाकर लोग रात को रखते हैं। एक है जन्माष्टमी, इसमें रात में भगवान का अभिषेक और उत्सव होता है। जन्माष्टमी के दिन moon बिल्कुल 50% पोजीशन पर होता है। दीपावली के दिन बिल्कुल farest पोजीशन पर होता है। यह darkest night है। और शरद पूर्णिमा के दिन brightest night है, चंद्रमा का प्रभाव पानी के ऊपर होता है। हमारे शरीर का भी 70% हिस्सा पानी है। high tide और low tide जैसे कि सब जानते हैं, और जब यह इस मौसम में वर्षा के बाद refresh होता है। तब यह तीनों पर्व एक alignment में आते हैं। पहले जन्माष्टमी आई, उसके बाद में शरद पूर्णिमा आई, उसके बाद दीपावली आएगी, हर वर्ष का यह क्रम है। 3 महीने मैं चातुर्मास का पड़ाव खत्म होने से पहले यह तीनों पर आ जाएंगे। चारों महीना पहले लोग नियम व्रत कायदे का पालन करते हैं। रात भर जाग कर we call it sink with the moon इसलिए जन्माष्टमी का पर्व हम सब लोगों को घर पर बनाना चाहिए।
*गुरुदेव समर्पणम*
।।परमाराध्य पूज्य श्रीमन माध्व गोडेशवर वैष्णवआचार्य श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महराज ||
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