Radharamano Vijayate

Hindi —
*कथा सूत्र*
*मनमाधवगौडेश्वर वैष्णवाचार्य श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज*
गुरुदेव महाराज कहते हैं कि सत्संग सुनने की रुचि भी ठाकुर जी को प्रसन्न कर देती है। आपके भीतर इस प्रकार की जिज्ञासा ही जागृत हो जाए, तो ठाकुर जी प्रसन्न हो जाते हैं। सबसे पहले जो आपके अंदर घटता है, वह जिज्ञासा ही है, लालसा ही है। विपासा ही है। प्रक्रिया उसके बाद का विषय है। इच्छा उसकी भूमिका का विषय है। बहुत सारे समय पर हमारे भीतर इच्छा हो जाती है, प्रक्रिया नहीं हो पाती। बहुत बार हो रही क्रिया के पीछे हमारी इच्छा ही नहीं होती। कर तो रहे हैं, करना तो पड़ेगा ही, अब क्या करें, पर सच कह मौका ढूंढता है कि अवसर लगे तो इधर-उधर हो जाएं। हृदय में सत्संग की इच्छा जागृत होना, जिज्ञासा जागृत होना ही, हमें सत्संग की पात्रता प्रदान करता है।
*गुरुदेव समर्पणम*
।।परमाराध्य पूज्य श्रीमन माध्व गोडेशवर वैष्णवआचार्य श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महराज ||
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