Pundrik Ji Sutra 23/10/2026
Radharamano Vijayate

Hindi —
*कथा सूत्र*
*मनमाधवगौडेश्वर वैष्णवाचार्य श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज*
गुरुदेव महाराज कहते हैं कि ब्रज का साधक कभी ब्रज से बाहर नहीं जाता। वह प्रकट ब्रज से और अप्रकट ब्रज में प्रवेश करता है। अन्य स्थान का वासी अन्य लोक में जा सकता है, पर यही तो बात विशेष है। *भाग्य बड़ो वृंदावन पायो*
प्रकट वृंदावन क्या है? जहां अनुभव में कृष्ण है, और दृश्य में लौकिक जगत भी दिखता है। पर अप्रकट वृंदावन क्या है, जहां अनुभव में भी कृष्ण है और दृश्य में भी कृष्ण है जहां कुछ भी लौकिक प्रतीत ही नहीं हो सकता। हालांकि प्रकट वृंदावन भी लौकिक नहीं है। क्योंकि प्रबोधान्नद सरस्वती जी लिखते हैं *यत्र प्रविष्ट सकलोपि जन्तु आनंद सचित घनताम प्रति*
बाबा जी कहते हैं कि जिस हजारों साल की समाधि लगाने के बाद भी सदारणवता, चिदारणवता, आनन्दारणवता की एक बिंदु योगी को प्राप्त नहीं होती, उसके सिंधु की अनुभूति ब्रज में गोबर में डोल रहे एक कीट को भी प्राप्त हो जाती है।
*गुरुदेव समर्पणम*
।।परमाराध्य पूज्य श्रीमन माध्व गोडेशवर वैष्णवआचार्य श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महराज ||
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