Pundrik Ji Sutra 3/11/2026
Radharamano Vijayate

Hindi —
*लुधियाना भागवत कथा के मोती*
*तृतीय दिवस*
1.दुनिया में किसी की औकात नहीं है जो भक्ति का दाम लगा सके।
संतो ऋषियों ने हरि बोल का आध्यात्मिक अर्थ लगाया है। *ह से हरी र से राधिका ब से वृंदावन ल से वृंदावन की विशुद्ध लीला*।
2.धाराओं के उदय होने का काल को विजय काल कहा जाता है। उसमें किया जाने वाला कोई भी कार्य सिद्ध होता है।
3.विजयी वह नहीं जिसने दूसरे को जीता है, विजयी वह है, जिसने आंखों को जीत लिया है। दोष दर्शन ना होना ही आंखों को जीतना है।
4.जहां सीता जी की करुणा का प्राकट्य हुआ है। वहां राम जी की सहनशीलता का प्राकट्य हुआ है।
5.बृज लीला में श्री राधा रमण जी विजयदशमी के दिन हाथी पर सवार होकर दर्शन देते हैं।
6.अष्ट सखियां आकर कर सखियां आगे के पर चार सखी पीछे के पर विशाखा सखी की छोटी पूछ बन गई। स्वयं अष्ट सखियों ने हाथी का रूप लेकर प्रिया जी और ठाकुर जी को अपने ऊपर विराजमान किया और ब्रज ले गई। विजयदशमी के दिन राधारमण जी के इस अंतरंग मानसी लीला का चिंतन दर्शन होता है।
7.विजयदशमी की लीला ठाकुर जी के नाम धाम रूप गुण लीला में बड़े-बड़े भी मोहित हो जाते हैं।
*गुरुदेव समर्पनम*
।।परमाराध्य पूज्य श्रीमन माध्व गोडेशवर वैष्णवआचार्य श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महराज ||
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